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  • Writer's pictureCurious Observer

यात्रा

 
 
छोड़कर यही गली, छोड़कर यही शहर, जा रहे हैं हम कहां, यह पता नहीं मगर.
हर कहीं बहार है, हर किसी का प्यार है, दिल कहीं हमारा है, लग रहा नहीं मगर.
चल जहाँ पे धूल है, गुनगुनाते फूल हैं, चल जहाँ पहाड़ हैं, चूमते हुए सागर.
सुन हवाओं की ये धुन, कह रही है क्या ये सुन, "ज़ोर से तू बह ज़रा, थक गया तो क्या फ़िक्र."

— Curious Observer

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